देवास

डा. सुरेश शर्मा: होम्योपैथी की मुस्कान, सेवा का संकल्प होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं समाजसेवी – व्यक्तित्व दर्शन

इन्फार्म ह्यूमन, देवास

प्रस्तावना: हंसी में बसी हीलिंग
चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो दवा से पहले अपनी मुस्कान से ही मरीज का आधा दर्द हर लेते हैं। डॉ. सुरेश शर्मा ऐसे ही शानदार व्यक्तित्व के धनी हैं। होम्योपैथिक चिकित्सा के गहरी जानकारी रखने वाले डॉ. शर्मा ने इस विद्या का गहराई से अध्ययन किया है। पर इनकी असली पहचान है – इनके व्यक्तित्व में बसा गजब का आकर्षण।

होम्योपैथी के ज्ञाता: अनुभव और अध्ययन का संगम
डॉ. सुरेश शर्मा सिर्फ डिग्रीधारी डॉक्टर नहीं हैं, होम्योपैथी के सच्चे साधक हैं। वर्षों तक इस पद्धति का सूक्ष्म अध्ययन कर इन्होंने हजारों मरीजों को राहत दी है। उनका कहना है कि होम्योपैथी में अभी तक कई मरीजों को वह अपने बेहतरीन इलाज से ठीक कर चुके हैं।

इनका मानना है कि होम्योपैथी बीमारी का नहीं, बीमार का इलाज करती है। इसीलिए हर मरीज की केस हिस्ट्री, स्वभाव और जीवनशैली को समझकर ही दवा देते हैं। इनके क्लिनिक में दवा के साथ सहानुभूति भी मिलती है।

व्यक्तित्व: सहजता और आकर्षण का मिश्रण
डॉ. शर्मा के व्यक्तित्व में गजब का आकर्षण है। वे हमेशा लोगों से हंसकर मिलते हैं, सहजता से बात करते हैं। इनसे मिलकर लगता ही नहीं कि आप किसी डॉक्टर से मिल रहे हैं – एक अपनापन, एक भरोसा तुरंत बन जाता है।

इनकी आवाज में मिठास है, व्यवहार में विनम्रता है। मरीज हो या मित्र, गरीब हो या अमीर – सबके लिए इनका दरवाजा और दिल हमेशा खुला रहता है।

शिक्षा और समाजसेवा: दोहरी जिम्मेदारी
डॉ. सुरेश शर्मा का शिक्षा जगत में भी हस्तक्षेप है। वे मानते हैं कि एक स्वस्थ समाज के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों जरूरी हैं।

मध्य प्रदेश दृष्टिहीन कन्या छात्रावास व अन्य संगठनों से जुड़कर समाज सेवा के कार्यों में भी अग्रणी हैं। दृष्टिबाधित बेटियों की शिक्षा, उनके इलाज और उनके आत्मनिर्भर बनने की मुहिम में ये बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इनके लिए समाजसेवा प्रचार नहीं, प्रायश्चित है।

चिकित्सा का दर्शन: मरीज पहले, फीस बाद में
डॉ. शर्मा के लिए चिकित्सा पेशा नहीं, पूजा है। कई बार जरूरतमंद मरीजों का इलाज बिना फीस लिए भी कर देते हैं। उनका मानना है – “दुआ में जो ताकत है वो दवा में भी नहीं”।

इनकी डायग्नोसिस में गहराई है और काउंसलिंग में अपनापन। इसीलिए मरीज कहते हैं – “डॉ. साहब के पास जाकर ही आधा ठीक हो जाते हैं”।

निष्कर्ष: हंसी बांटते, सेहत देते डॉ. शर्मा
डॉ. सुरेश शर्मा शानदार व्यक्तित्व के धनी हैं। होम्योपैथी का ज्ञान, समाजसेवा का जुनून और शिक्षा के प्रति समर्पण – इन तीनों का संगम इन्हें खास बनाता है।

ये साबित करते हैं कि डॉक्टर की असली डिग्री उसकी सहानुभूति होती है। इनकी मुस्कान में दवा है, इनकी बात में भरोसा है।

इन्फॉर्म ह्यूमन की प्रति वर्षगांठ पर पचमढ़ी में आयोजित सत्य उदय समिट 2026 में डॉ. शर्मा स्वास्थ्य एवं समाजसेवा विषय पर अपने अनुभव साझा करेंगे।


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