इन्फार्म ह्यूमन, देवास
प्रस्तावना: बहुआयामी प्रतिभा के धनी
कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो एक नहीं, अनेक विधाओं के ज्ञाता होते हैं। सीनियर एडवोकेट, समाजसेवी, लेखक प्रवीण चौधरी ऐसे ही अद्भुत व्यक्तित्व के धनी हैं। कानून की बारीकी, कलम की धार और मंच की पकड़ – तीनों का ऐसा संगम विरले ही देखने को मिलता है। इनके व्यक्तित्व में अनुभव की गहराई, ज्ञान की ऊंचाई और सेवा की सच्चाई एक साथ दिखती है।
विधि के ज्ञाता: न्याय के प्रहरी
सीनियर एडवोकेट प्रवीण चौधरी ने दशकों तक न्याय के मंदिर में पीड़ितों को न्याय दिलाने का काम किया है। कानून की किताबों से ज्यादा इनकी दलीलों में जीवन का अनुभव बोलता है। जटिल से जटिल मामलों में भी इनकी तर्कशक्ति और तथ्यों की प्रस्तुति मिसाल बनती है। नई पीढ़ी के अधिवक्ताओं के लिए ये चलती-फिरती पाठशाला हैं।
लेखक और विचारक: शब्दों के शिल्पी
प्रवीण जी सिर्फ कोर्ट में ही नहीं, साहित्य के मंच पर भी उतने ही सशक्त हैं। लेखक के रूप में समाज, राजनीति और न्याय व्यवस्था पर इनकी कलम बेबाक चलती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री वरिष्ठ पत्रकार अरुण शौरी के साथ इंदौर में आयोजित मध्य प्रदेश पत्र लेखक संघ के प्रांतीय सम्मेलन में स्मारिका का विमोचन इनके साहित्यिक योगदान का गवाह है। उस अवसर पर तत्कालीन प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. जैनेंद्र जैन के साथ प्रवीण जी की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा दी।
इतिहास के साक्षी: मंच से माइक तक
प्रवीण चौधरी जी भाजपा और जनसंघ के ऐतिहासिक आयोजनों के जीवंत साक्षी रहे हैं। मंच संचालन की कला में इन्हें महारत हासिल है।
1985 में बागली तहसील के ग्राम भमोरी में जब पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी दुग्ध संघ के भवन का लोकार्पण और बोनस वितरण करने आए थे, उस कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता प्रवीण चौधरी द्वारा किया गया था। चित्र सौजन्य: प्रवीण चौधरी
उससे भी पहले 17 मई 1981 का बागली गांधी चौक का वो ऐतिहासिक दृश्य – जब राजनीति के संत श्री कैलाश जी जोशी को कार्यकर्ताओं द्वारा कार भेंट की गई थी। भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अटल बिहारी वाजपेयी के आतिथ्य में विशाल आमसभा हुई। अटल जी ने स्वयं कैलाश जी को कार की चाबी भेंट की थी। उस मंच पर राजमाता विजया राजे सिंधिया, कुशाभाऊ ठाकरे जैसे दिग्गज उपस्थित थे। तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री श्री सुंदरलाल पटवा संबोधित कर रहे थे और उस ऐतिहासिक कार्यक्रम का संचालन भी अधिवक्ता प्रवीण चौधरी ने ही किया था। चित्र सौजन्य: प्रवीण चौधरी
समाजसेवी: संवेदना का दूसरा नाम
कानून और कलम के साथ समाजसेवा इनके व्यक्तित्व का तीसरा आयाम है। सामाजिक संगठनों से जुड़कर ये वंचितों की आवाज बनते हैं। इनके लिए समाजसेवा फोटो का अवसर नहीं, फर्ज का अहसास है।
निष्कर्ष: अनुभव का विश्वकोश
प्रवीण चौधरी जी एक चलते-फिरते विश्वकोश हैं – कानून के, राजनीति के, इतिहास के और संवेदना के। अटल जी से लेकर अरुण शौरी तक, कैलाश जोशी से लेकर कुशाभाऊ ठाकरे तक – इन्होंने इतिहास को बनते देखा है और बनाने में भूमिका निभाई है।
इनका जीवन बताता है कि व्यक्ति एक होकर भी अनेक हो सकता है – वकील भी, लेखक भी, संचालक भी और सेवक भी।
इन्फॉर्म ह्यूमन की प्रति वर्षगांठ पर पचमढ़ी में आयोजित सत्य उदय समिट 2026 में प्रवीण चौधरी जी बतौर विशिष्ट वक्ता अपने अनुभवों से हमारा मार्गदर्शन करेंगे।



नोट: उक्त ऐतिहासिक विवरण अधिवक्ता प्रवीण चौधरी द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं।



