देवास

सत्य उदय से लेकर काशी तक की यात्रा…और मां का पंचतत्व में विलीन होना

हम पचमढ़ी में थे, 21 को सम्मिट का समापन हुआ और घर से फ़ोन आ गया भैया… मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है आप जल्दी आ जाओ…हम पचमढ़ी से सीधे गाडरवारा पहुंच गए…देखा मां की हालत बहुत ज्यादा खराब है… हम उसी रात एंबुलेंस से मां को लेकर रात में ही सीधे भोपाल पहुंच गए… जेके में भर्ती किया…दो दिन लगातार इलाज जारी रहा.. किंतु सुधार नहीं दिखा… हमनें तय किया इंदौर चलते हैं मां को लेकर… जेके से डिस्चार्ज करने का फाइनल किया…इस बीच तबीयत और बिगड़ गई… डाक्टरों ने बताया…अब कैंसर पूरे शरीर में फ़ैल चुका है… मां कुछ दिन की ही मेहमान है… तीसरे दिन हालत बहुत नाज़ुक थी.. जरूरी जांचों के लिए शरीर तैयार नहीं था… इंदौर जाना कैंसिल किया… जहां तीन वर्ष पहले इलाज चल रहा था… इंदौर में वहां के डाक्टरों से बात हुई…तय हुआ जेके में ही इलाज जारी रखेंगे…अब तक मां की हालत और नाजुक हो चुकी थी… दोपहर में तीसरे दिन मां ने मुझसे बात की…कहा पचमढ़ी का इवेंट बहुत सफल रहा…और फिर मुझसे कहा भैया मुझे मोसंबी का जूस पीना है… मैंने जूस लाकर दिया.. उन्होंने ने खुद के हाथ से पूरा जूस पिया वह आखिरी था… उसके बाद मां ने खाना पीना छोड़ दिया था… मां अब अगले दिन आईसीयू में थी… डाक्टरों से बात हुई… उन्होंने कहा अंतिम समय में आप लोग चाहें तो मां को घर ले जाएं… पिता जी से पूछा… उन्होंने कहा हम लोग उन्हें लेकर काशी चलते हैं…फिर कुछ देर बाद उन्होंने जोर देकर कहा हम काशी ही जाएंगे…फिर क्या था…दो घंटे में एंबुलेंस.. डिस्चार्ज की प्रोसेस कर निकल गये हम परिवार के लगभग 16 सदस्य अपनी मां को लेकर भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी के लिए…रातभर सफर किया.. अगले दिन सुबह 11 बजे काशी पहुंचे… मुक्ति भवन में हमें एक कक्ष मिला जहां मां को शिफ्ट किया…बगल की एक होटल में दो रूम भी बुक किए… मां अचेत अवस्था में थी… सिर्फ सांसें चल रही थी…24 घंटे बीत चुके थे… लगातार प्रभु चरणों में प्रार्थनाओं का दौर जारी था… सुबह मैं मां की मुक्ति की प्रार्थना के लिए गंगा मैया के पास गया… दोपहर में कुछ परिजनों ने काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंच कर प्रार्थना की…वे लोग वहां से प्रसाद लेकर मां के पास पहुंचे… उसके आधे घंटे बाद मां ने देह त्याग दिया… मैं उस वक्त रूम में था…भाई का फोन आया भैया आ जाओ मां नहीं रही… मां ने देह त्याग दिया… पिता जी बहुत रो रहे थे… किंतु वे कह रहे थे जैसे वे हमें समझा रहे थे कि तुम्हारी मां मोक्ष को प्राप्त हो गयी है… अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई… शाम सात बजे तक मां की अंतिम यात्रा पंचकर्णिका घाट पहुंच चुकी थी…तमाम रीति विधि विधान होने बाद मां के पार्थिव शरीर को जैसे ही मेरे द्वारा अग्नि दी गई उधर मंदिरों में आरती का समय होने के कारण शंख और घंटियों की गूंज वातावरण में फैल गई… मैं देख रहा था मां का शरीर जल रहा था.. गंगा मैया की आरती हो रही थी… प्रभु की वंदना में भक्त डूबे हुए थे और हम लोग मां को याद कर रहे… पिता जी ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर कहा तुम्हारी मां शिवभक्त थी… तपस्वनी थी… मैं उनसे लिपटकर खूब रोया…फिर मैं एकांत में गंगा मैया के घाट पर आकर बैठ गया…दूर से देख रहा था मैं मां की जलती हुई चिता को… मुझे याद आ रही थीं मां की बातें… मेरी आंखों से लगातार आंसू झर रहे थे…फिर मां ने मुझसे बहुत बातें की…मेरे आंसुओं को पोंछा और कहा खुश रहना…सबका ख्याल रखना… अपने पिता का बहुत ज्यादा… मां जा चुकी है… किंतु मुझे लगता है वह मुझसे अभी भी बात करती है…
पापा कह रहे थे वह मुझसे बहुत करती थी…हालांकि मां हम सभी भाई बहनों से बहुत प्यार करती थी….मुझे अभी भी मां की बहुत याद आ रही है

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page