इन्फार्म ह्यूमन, देवास। देवास की ऐतिहासिक और रियासतकालीन विरासत का प्रतीक श्रीकृष्ण दिंडी यात्रा आज सीनियर राजबाड़ा से अपार श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक गरिमा के साथ निकाली गई।
राजबाड़ा स्थित प्राचीन मंदिर में विधि-विधान से पूजन के बाद भगवान श्रीकृष्ण को पुष्पों से सुसज्जित पालकी में विराजमान किया गया। देवास राजपरिवार के महाराज विक्रमसिंह पवार ने पालकी को कंधा देकर पीढ़ी-दर-पीढ़ी निभाई जा रही इस गौरवशाली परंपरा का निर्वहन किया।
पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-ताशों की गूंज, भजन-कीर्तन और भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष के बीच निकली दिंडी यात्रा ने पूरे देवास को कृष्णमय कर दिया। यात्रा के मार्ग पर श्रद्धालुओं और नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर भगवान की पालकी का आत्मीय स्वागत किया।
यह दिंडी यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि देवास की राजवंशीय विरासत, सांस्कृतिक चेतना, आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। लगभग 120 वर्षों से निरंतर चली आ रही यह परंपरा आज भी देवास की विशिष्ट पहचान को पूरी भव्यता के साथ संजोए हुए है।
आस्था भी… परंपरा भी… और देवास की गौरवशाली पहचान भी।
शिप्रा ब्रिज पर कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध, अवैध कट और अतिक्रमण पर कार्रवाई के निर्देश; शहर में यातायात बाधित कर रहे बिजली के पोल एक सप्ताह में हटेंगे
देवास। शहर और जिले की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। सड़क पर मनमाने ढंग से वाहन खड़े करने, निर्धारित स्थान के बजाय बीच सड़क पर सवारी उतारने-चढ़ाने, रॉन्ग साइड चलने और सिग्नल तोड़ने वालों पर कार्रवाई के साथ अब लाइसेंस निलंबन और परमिट निरस्तीकरण तक की कार्रवाई की जाएगी। शिप्रा ब्रिज पर व्यवसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाते हुए कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण और उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर कार्यालय में बुधवार को कलेक्टर ऋतुराज सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई। पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद की मौजूदगी में जिले की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, महिला अपराध, एससी-एसटी अपराध, नशा मुक्ति, चिन्हित अपराध, गबन-धोखाधड़ी और अवैध खनन सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की गई।
शिप्रा ब्रिज पर दुकानदारी पर रोक
बैठक में शिप्रा ब्रिज पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ब्रिज पर किसी भी प्रकार का व्यवसाय नहीं होने दिया जाए। प्रतिबंध के बावजूद दुकान या अन्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने वालों पर अर्थदंड सहित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर ब्रिज को व्यावसायिक गतिविधियों से मुक्त रखने के निर्देश दिए गए।
बीच सड़क सवारी रोकी तो लाइसेंस-परमिट पर कार्रवाई
देवास शहर में बस, ई-रिक्शा, ऑटो रिक्शा और मैजिक वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग एवं संचालन को लेकर भी सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने आरटीओ को निर्देश दिए कि वाहन केवल निर्धारित स्थानों पर ही रुकें। बीच सड़क वाहन रोककर यातायात बाधित करने वालों के विरुद्ध लाइसेंस निलंबन और परमिट निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।
ई-रिक्शा के लिए निर्धारित रूट तय कर सभी वाहनों को उसी के अनुसार संचालित कराने तथा नियमों की जानकारी देने वाला सर्कुलर वाहनों पर चस्पा कराने के निर्देश भी दिए गए।
एक सप्ताह में हटेंगे यातायात में बाधक बिजली के पोल
शहर के प्रमुख मार्गों पर यातायात में बाधा बन रहे बिजली के खंभों को लेकर कलेक्टर ने एमपीईबी को एक सप्ताह की समय-सीमा दी है। उन्होंने कहा कि पूर्व में निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। निर्धारित अवधि में पोल नहीं हटाए गए तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
रॉन्ग साइड, सिग्नल तोड़ने और शराब पीकर ड्राइविंग पर शिकंजा
ट्रैफिक पुलिस को सिग्नल तोड़ने और रॉन्ग साइड वाहन चलाने वालों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। ई-रिक्शा, ऑटो और मैजिक वाहनों की नंबरिंग करने के साथ मॉडिफाइड साइलेंसर से तेज आवाज करने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई होगी। शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ पूरे जिले में चालानी कार्रवाई कर अगली बैठक में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
अतिक्रमण और नो-पार्किंग पर चलेगा अभियान
एबी रोड तथा इंदौर रोड ब्रिज के नीचे से अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस को संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। नो-पार्किंग क्षेत्र में वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ क्रेन से कार्रवाई होगी। साथ ही शहर के सभी ट्रैफिक सिग्नल शीघ्र शुरू कराने के निर्देश नगर निगम को दिए गए।
अवैध कट बंद होंगे, ढाबा संचालकों को नोटिस
एबी रोड पर आदियोगी हॉस्पिटल के सामने जाली तोड़कर बनाए गए अवैध कट को बंद करने के निर्देश दिए गए। जाली तोड़कर कट बनाने वालों पर कार्रवाई के साथ आटा मिल और आदियोगी हॉस्पिटल संचालक को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में ढाबों के सामने बनाए गए अवैध कट पॉइंट को लेकर भी संबंधित ढाबा संचालकों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
बकरा हाट और रेती मंडी के लिए अलग जगह होगी तय
नौसराबाद बायपास चौराहे पर बकरा हाट लगाने पर रोक लगाते हुए प्रशासन को इसके लिए वैकल्पिक स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य मार्गों पर रेती मंडी लगाने और रेत से भरे ट्रैक्टर खड़े करने वालों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
शहर के अंदर पटाखा दुकानें नहीं
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए पटाखा दुकानों के लिए निर्धारित स्थान शीघ्र चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शहर के अंदर पटाखा दुकानें लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इनका संचालन केवल निर्धारित स्थान पर ही होगा।
क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के निर्देश
कन्नौद में दशहरा मैदान के सामने क्षतिग्रस्त सड़क और गड्ढों की शीघ्र मरम्मत तथा गंधर्वपुरी बस स्टैंड के समीप सड़क पर उचित पेचवर्क कराने के निर्देश दिए गए। देवास शहर के एबी रोड से निराश्रित पशुओं को हटाने के लिए भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
हिट एंड रन योजना में देवास प्रदेश में प्रथम
बैठक के दौरान हिट एंड रन योजना के तहत 10 परिवारों को कुल 8 लाख रुपए के सांकेतिक चेक वितरित किए गए। अधिकारियों ने बताया कि योजना के संचालन में देवास जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर है। जिले में हिट एंड रन के कुल 186 प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें 111 प्रकरण स्वीकृत हो चुके हैं। सामान्य बीमा परिषद, मुंबई द्वारा अब तक 78 प्रकरणों में 70.50 लाख रुपए की राशि जारी की जा चुकी है।
बैठक में नगर निगम आयुक्त दलीप कुमार, अपर कलेक्टर शोभाराम सोलंकी, अपर कलेक्टर संजीव जैन सहित जिला अधिकारी, पुलिस अधिकारी और जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
इन्फार्म ह्यूमन, देवास। किसान एवं गुरु गंगदास फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (प्रा.लि.) के चेयरमैन जगपाल सिंह सिकरवार के जीवन संघर्ष, कृषि क्षेत्र में उनकी यात्रा तथा किसानों को प्रगति की नई राह दिखाने के प्रयासों पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री “मिट्टी से मुकाम तक” का लोकार्पण समारोह गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
INFORM HUMAN – Media Production House द्वारा निर्मित इस डॉक्यूमेंट्री में श्री सिकरवार की मिट्टी से जुड़ी जीवन यात्रा, संघर्ष से सफलता तक के सफर तथा कृषि एवं किसान हित में किए गए उनके प्रयासों और उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन को उपस्थित किसानों एवं अतिथियों ने सराहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदीप सिंह सिसौदिया (जागीरदार), पूर्व जिला पंचायत सदस्य रहे। उन्होंने श्री सिकरवार की संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा एवं कृषि क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए इसे किसान समाज और युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया।
कंपनी के पदाधिकारियों का हुआ सम्मान
समारोह के दौरान कृषि एवं किसान हित में किए जा रहे योगदान के लिए गुरु गंगदास फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (प्रा.लि.) के पदाधिकारियों का INFORM HUMAN की ओर से सम्मान-पत्र प्रदान कर अभिनंदन किया गया।
सम्मानित पदाधिकारियों में चेयरमैन जगपाल सिंह सिकरवार, वाइस चेयरमैन देवकरण पाटीदार तथा डायरेक्टर धर्मेन्द्र सिंह राजपूत, अजय सिंह बैस (मलेंडिया) एवं मांगीलाल पाटीदार शामिल रहे।
बड़ी संख्या में पहुंचे क्षेत्र के किसान
समारोह में बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसान मौजूद रहे। इसके अलावा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। किसानों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन INFORM HUMAN के संस्थापक राजेश व्यास द्वारा किया गया। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री की अवधारणा और इसके निर्माण के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज के बीच संघर्ष के बल पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले व्यक्तित्वों की जीवन यात्राओं को दस्तावेज के रूप में संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुँचाना INFORM HUMAN की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
“मिट्टी से मुकाम तक” के माध्यम से एक किसान की व्यक्तिगत सफलता के साथ कृषि, संघर्ष, आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रगति की उस यात्रा को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जो दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा बन सके।
INFORM HUMAN – Media Production House आने वाले समय में भी विभिन्न क्षेत्रों में संघर्ष के बल पर सफलता और विशिष्ट पहचान हासिल करने वाले प्रेरक व्यक्तित्वों की कहानियों को डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से सामने लाएगा।
विश्व छायांकन दिवस पर बर्ड एवं नेचर फोटोग्राफर मोहन सिंह राजपूत का संदेश
इन्फार्म ह्यूमन, देवास। विश्व छायांकन दिवस के अवसर पर बर्ड एवं नेचर फोटोग्राफर मोहन सिंह राजपूत ने सभी छायाकारों एवं प्रकृति प्रेमियों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि “हमने प्रकृति को देखा नहीं, महसूस किया है और कैमरे के माध्यम से उसकी सुंदरता को दिखाया है।” उन्होंने कहा कि बर्ड एवं नेचर फोटोग्राफी के लिए कैमरा तस्वीर लेने का माध्यम ही नहीं है, बल्कि प्रकृति के अनमोल संसार को सहेजने की अभिव्यक्ति का संवेदनशील साधन है। प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर तस्वीर के भीतर प्रकृति की कहानी को समेटने का प्रयास किया जाता है। मोहन सिंह राजपूत ने कहा कि तस्वीरों के माध्यम से पक्षियों, पर्यावरण एवं जैविक विविधता के संरक्षण के प्रति प्रेम और जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। कैमरे की दृष्टि से प्रकृति की सुंदरता को संजोते हुए उसके संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि इसी संकल्प के साथ नवोदित एवं अनुभवी छायाकारों तथा प्रकृति प्रेमियों को विश्व छायांकन दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
हम आजकल पोस्ट पढ़ते हैं। स्टेटस देख लेते हैं। तस्वीरों में सब मुस्कुरा रहे होते हैं। सुख-दुख में आने-जाने के संस्कार बने हुए हैं। सबकुछ संस्कृति, संस्कारों में बंधा हुआ दिखाई देता है। तस्वीरें बोलती हैं…
आजकल सबके पास मंच हैं। फालोवर्स के बड़े बड़े आंकड़े हैं। सबके अकाउंट एक्टिव हैं। डिजिटल टीम हैं और सभी, सभी नहीं तो ज्यादातर नेतृत्व के पास उनकी खुद की, स्वयं की चलती फिरती टीम है।
यह डिजिटल युग का बदला हुआ दौर और सबकुछ तस्वीरों में बेहतरीन दिखाई जाने वाले अपडेट्स। टीम एक्टिव और अट्रेक्ट कंटेंट पोस्ट करने में माहिर। हम इसी दौर में खोज रहे हैं, हम से आशय कुछ चिंतक, कुछ पत्रकार साथी, वे तस्वीरें जो बन जाएं हैडलाइंस, बन जाएं बेकिंग न्यूज़, या यूं कहें कि कुछ मसाला, और बने चर्चा का विषय, किंतु अब जब सबके हाथ में है मोबाइल और सब कोशिश करते बेहतर कंटेंट अपलोड करने की, इन्हीं बेहतर और बेहतरीन तस्वीरों में से खोजना है अब, तस्वीरों के पीछे की कहानी, यह जाल है.. बड़ा जाल है.. यहीं जंजाल भी हो सकता है तय नहीं है कुछ भी, जो दिखाई दे रहा है या जो दिखाया जा रहा है वह किसके लिए कितना सच और किसके लिए कितना झूठ, सब अपने अपने हिस्से का हिसाब खुद करें।
आप के भी खुद के अकाउंट होंगे। आप हम भी तो यही करते हैं। किंतु सबकी अपनी-अपनी कहानियां हैं, इन्हीं कहानियों में उलझे हुए हैं सच, संस्कार, संस्कृति और दिनभर के अनेक अनेक प्रसंग,
अब बहुत मुश्किल है इन मुस्कुराते हुए चेहरों की अपेक्षाओं, उपेक्षाओं और उपलब्धियों के लिए दिन-रात एक करते हुए संघर्ष की कहानियों को पढ़ पाना।
ऐसा ही कुछ लगता है सभी के मुस्कुराते हुए चेहरों को देखकर, किंतु मन मानव मन, संतत्व भाव , या कोई भी भाव समय के साथ बदलते रहते हैं यह प्राकृतिक है और अभिलाषाएं, अपेक्षाएं, उपेक्षाएं… इन्हीं में कहीं छिपे होते हैं और इन्ही में मिलते हैं इन्हीं प्रश्नों के उत्तर।
आशय यह नहीं है कि किसी भी स्थिति का विरोध या आलोचना की जा रही हो, आशय यह भी नहीं है कि सबकुछ गलत है, किंतु हमेशा सबकुछ सही है यह भी तो, सही नहीं है।
विशेष संपादकीय। वर्षा व्यास, क्रिएटिव एडिटर। इन्फार्म ह्यूमन
आज के डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में किसी भी देश का कोई स्थानीय मुद्दा केवल उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। चाहे वह कोई नीतिगत विरोध हो, परीक्षा विवाद हो या सामाजिक आंदोलन—पलक झपकते ही उसकी तस्वीरें, वीडियो और स्वर वैश्विक मंच पर पहुंच जाते हैं। दुनिया भर की मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह बारीकी से देखते हैं कि कोई राष्ट्र अपने नागरिकों के मुद्दों को कैसे संभालता है और उस देश की युवा पीढ़ी अपने विचारों को कैसे व्यक्त करती है।
हाल के दिनों में भारत में NEET परीक्षा को लेकर उठी चिंताएं और छात्रों का आक्रोश एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय रहा है। लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर आवाज उठाना, सवाल पूछना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जिस तरह से कुछ युवाओं द्वारा अभद्र भाषा और मर्यादाहीन टिप्पणियों का सहारा लिया गया, उसने एक गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।
विरोध और मर्यादा: क्या यही है देश का भविष्य? लोकतंत्र में असहमति की जगह हमेशा होती है, और जब बात युवाओं के भविष्य की हो, तो उनका आक्रोश समझ में आता है। लेकिन जब विरोध का स्वरूप वैचारिक न रहकर निजी लांछन और अभद्र शब्दावली में बदल जाता है, तब मूल मुद्दा पीछे छूट जाता है।
जब देश के प्रधानमंत्री या किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है, तो सवाल केवल एक व्यक्ति का नहीं रह जाता। सवाल यह उठता है कि:
क्या आक्रोश व्यक्त करने का एकमात्र माध्यम शब्दों की मर्यादा तोड़ना है?
क्या हमारी शिक्षा और संस्कार हमें असहमति के दौरान भी गरिमा बनाए रखना नहीं सिखाते?
युवा किसी भी देश का भविष्य और उसकी बौद्धिक पहचान होते हैं। जब दुनिया यह देखती है कि देश के सबसे योग्य और प्रतिस्पर्धी छात्र (जो कल के डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासक बनेंगे) विरोध दर्ज कराने के लिए अभद्र शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं, तो यह उनकी नेतृत्व क्षमता और परिपक्वता पर सवाल खड़े करता है।
वैश्विक मंच पर देश और संस्कृति की छवि भारत की पहचान पूरी दुनिया में उसकी समृद्ध संस्कृति, ‘अतिथि देवो भव’ के विचार और अनुशासित नागरिक मूल्यों के लिए रही है। हमारे संस्कार सिखाते हैं कि विरोध कितना भी तीखा क्यों न हो, वाणी की गरिमा कभी नहीं खोनी चाहिए।
जब विदेश में बैठे लोग या अंतरराष्ट्रीय मीडिया ऐसे वीडियो देखते हैं जहाँ देश के सर्वोच्च नेतृत्व के प्रति बेहद अशोभनीय बातें कही जा रही हों, तो उससे दो मुख्य बातें सामने आती हैं:
संस्कारों पर प्रश्नचिह्न: इससे दुनिया के सामने हमारी सांस्कृतिक नींव और नैतिक मूल्यों (संस्कारों) का गलत संदेश जाता है।
संवाद के स्तर में गिरावट: यह संकेत मिलता है कि हमारे राजनीतिक व सामाजिक संवाद का स्तर गिर रहा है, जहाँ तर्कों की जगह गाली-गलौज और अभद्रता लेती जा रही है।
सशक्त विरोध के लिए संयम और तर्क की आवश्यकता इतिहास गवाह है कि दुनिया के सबसे बड़े आंदोलन—चाहे वह भारत का स्वतंत्रता संग्राम हो या नागरिक अधिकारों की लड़ाई—अहिंसा, भाषा की गरिमा और मजबूत तर्कों के बल पर जीते गए हैं। महात्मा गांधी से लेकर डॉ. बी.आर. अंबेडकर तक, किसी ने भी अपनी बात मनवाने के लिए भाषा का स्तर नहीं गिरने दिया।
NEET जैसी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग पूरी तरह जायज है और इसके लिए सरकार व व्यवस्था से सख्त सवाल पूछे जाने चाहिए। लेकिन यदि विरोध की भाषा संयमित, तर्कपूर्ण और तथ्य आधारित होगी, तो उसे समाज और वैश्विक समुदाय का अधिक समर्थन मिलेगा।
निष्कर्ष आक्रोश और असंतोष का होना जीवंत लोकतंत्र की निशानी है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना एक परिपक्व समाज का लक्षण है। युवाओं को यह समझना होगा कि वे केवल अपना विरोध दर्ज नहीं करा रहे हैं, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यदि हम दुनिया के सामने एक सशक्त, संस्कारी और विश्वगुरु बनने की आकांक्षा रखने वाले भारत का निर्माण करना चाहते हैं, तो हमें अपनी असहमति में भी गरिमा और संस्कारों का परिचय देना होगा।
तीन दिवसीय समागम के चार सत्रों में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर हुआ व्यापक मंथन, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सामूहिक योगाभ्यास एवं कबीर भजनों की प्रस्तुति रही आकर्षण का केंद्र
देवास।INFORM HUMAN – Media Production House के तत्वावधान में मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पचमढ़ी स्थित होटल हाईलैंड में 19 से 21 जून 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय ‘सत्य उदय समिट-2026’ का सफलतापूर्वक एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। लगभग 80 प्रतिभागियों की सहभागिता वाले इस समागम में विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, समाजसेवियों, चिंतकों एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने समाज और राष्ट्रहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक संवाद किया।
समिट के दौरान आयोजित चार प्रमुख सत्रों में वास्तु, ज्योतिष, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अनेक महत्वपूर्ण सामाजिक, सांस्कृतिक एवं समसामयिक विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विषयों पर अनुभव, ज्ञान एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण साझा करते हुए समाज, राष्ट्र निर्माण, मानवीय मूल्यों, सकारात्मक जीवनशैली, जनजागरण, सामाजिक समरसता तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। प्रतिभागियों ने भी विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद कर अपने प्रश्न रखे और उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त किया।
समिट का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों के बीच रचनात्मक संवाद स्थापित करना, जनहित के विषयों पर गंभीर विमर्श को प्रोत्साहित करना तथा सकारात्मक विचारों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता और जनसहभागिता को सशक्त बनाना रहा। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में विचारों के आदान-प्रदान के साथ-साथ अनुभवों की साझेदारी और भविष्य की संभावनाओं पर भी सार्थक चर्चा हुई।
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर समिट में उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। योग सत्र के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बल देते हुए नियमित योग को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया गया।
समिट के सांस्कृतिक सत्र में प्रस्तुत कबीर भजनों ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को भारतीय संत परंपरा, आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता एवं मानवीय मूल्यों का प्रेरक संदेश दिया। कार्यक्रम की इस प्रस्तुति को सभी ने सराहा।
आयोजन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अतिथियों एवं प्रतिभागियों का सम्मान भी किया गया। सम्मान समारोह ने समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति एवं जनजागरण के क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तित्वों के योगदान को सम्मानित करते हुए आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों ने मिलकर बेहतर समाज निर्माण का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन सामूहिक प्रयास, जनसहभागिता, संवेदनशीलता और सतत संवाद से ही संभव है। सभी ने अपने-अपने क्षेत्र में समाजहित के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
INFORM HUMAN के संस्थापक राजेश व्यास ने समिट की सफलता के लिए सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, सहयोगी संस्थाओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘सत्य उदय समिट’ का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए विचारों का एक सशक्त मंच तैयार करना है। संस्था भविष्य में भी समाजहित, रचनात्मक संवाद, सकारात्मक मीडिया एवं जनजागरण से जुड़े ऐसे आयोजनों का आयोजन करती रहेगी।
उन्होंने बताया कि समिट में प्रस्तुत सभी वक्ताओं के विचारों एवं प्रमुख सत्रों का विस्तृत संकलन शीघ्र ही INFORM HUMAN के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर क्रमबद्ध रूप से जारी किया जाएगा। इसके साथ ही समिट की प्रमुख गतिविधियों, वक्ताओं के विचारों, विशेष आलेखों एवं यादगार क्षणों को समाहित करते हुए “विरासत” स्मारिका के संपादन कार्य का शुभारंभ कर दिया गया है।
गौरतलब है कि “विरासत” स्मारिका का भव्य विमोचन भविष्य में राजस्थान में आयोजित किए जाने वाले एक विशेष समारोह में किया जाएगा। समारोह की तिथि एवं स्थान की घोषणा उपयुक्त समय पर की जाएगी।
‘सत्य उदय समिट-2026’ ने यह संदेश दिया कि जब समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोग एक मंच पर आकर ज्ञान, अनुभव और विचारों का आदान-प्रदान करते हैं, तो संवाद से समाधान, सहयोग से विश्वास और सामूहिक प्रयास से बेहतर समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी सकारात्मक संकल्प के साथ तीन दिवसीय समिट का सफल समापन हुआ।
हम पचमढ़ी में थे, 21 को सम्मिट का समापन हुआ और घर से फ़ोन आ गया भैया… मम्मी की तबीयत ठीक नहीं है आप जल्दी आ जाओ…हम पचमढ़ी से सीधे गाडरवारा पहुंच गए…देखा मां की हालत बहुत ज्यादा खराब है… हम उसी रात एंबुलेंस से मां को लेकर रात में ही सीधे भोपाल पहुंच गए… जेके में भर्ती किया…दो दिन लगातार इलाज जारी रहा.. किंतु सुधार नहीं दिखा… हमनें तय किया इंदौर चलते हैं मां को लेकर… जेके से डिस्चार्ज करने का फाइनल किया…इस बीच तबीयत और बिगड़ गई… डाक्टरों ने बताया…अब कैंसर पूरे शरीर में फ़ैल चुका है… मां कुछ दिन की ही मेहमान है… तीसरे दिन हालत बहुत नाज़ुक थी.. जरूरी जांचों के लिए शरीर तैयार नहीं था… इंदौर जाना कैंसिल किया… जहां तीन वर्ष पहले इलाज चल रहा था… इंदौर में वहां के डाक्टरों से बात हुई…तय हुआ जेके में ही इलाज जारी रखेंगे…अब तक मां की हालत और नाजुक हो चुकी थी… दोपहर में तीसरे दिन मां ने मुझसे बात की…कहा पचमढ़ी का इवेंट बहुत सफल रहा…और फिर मुझसे कहा भैया मुझे मोसंबी का जूस पीना है… मैंने जूस लाकर दिया.. उन्होंने ने खुद के हाथ से पूरा जूस पिया वह आखिरी था… उसके बाद मां ने खाना पीना छोड़ दिया था… मां अब अगले दिन आईसीयू में थी… डाक्टरों से बात हुई… उन्होंने कहा अंतिम समय में आप लोग चाहें तो मां को घर ले जाएं… पिता जी से पूछा… उन्होंने कहा हम लोग उन्हें लेकर काशी चलते हैं…फिर कुछ देर बाद उन्होंने जोर देकर कहा हम काशी ही जाएंगे…फिर क्या था…दो घंटे में एंबुलेंस.. डिस्चार्ज की प्रोसेस कर निकल गये हम परिवार के लगभग 16 सदस्य अपनी मां को लेकर भारत की आध्यात्मिक राजधानी काशी के लिए…रातभर सफर किया.. अगले दिन सुबह 11 बजे काशी पहुंचे… मुक्ति भवन में हमें एक कक्ष मिला जहां मां को शिफ्ट किया…बगल की एक होटल में दो रूम भी बुक किए… मां अचेत अवस्था में थी… सिर्फ सांसें चल रही थी…24 घंटे बीत चुके थे… लगातार प्रभु चरणों में प्रार्थनाओं का दौर जारी था… सुबह मैं मां की मुक्ति की प्रार्थना के लिए गंगा मैया के पास गया… दोपहर में कुछ परिजनों ने काशी विश्वनाथ मंदिर में पहुंच कर प्रार्थना की…वे लोग वहां से प्रसाद लेकर मां के पास पहुंचे… उसके आधे घंटे बाद मां ने देह त्याग दिया… मैं उस वक्त रूम में था…भाई का फोन आया भैया आ जाओ मां नहीं रही… मां ने देह त्याग दिया… पिता जी बहुत रो रहे थे… किंतु वे कह रहे थे जैसे वे हमें समझा रहे थे कि तुम्हारी मां मोक्ष को प्राप्त हो गयी है… अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई… शाम सात बजे तक मां की अंतिम यात्रा पंचकर्णिका घाट पहुंच चुकी थी…तमाम रीति विधि विधान होने बाद मां के पार्थिव शरीर को जैसे ही मेरे द्वारा अग्नि दी गई उधर मंदिरों में आरती का समय होने के कारण शंख और घंटियों की गूंज वातावरण में फैल गई… मैं देख रहा था मां का शरीर जल रहा था.. गंगा मैया की आरती हो रही थी… प्रभु की वंदना में भक्त डूबे हुए थे और हम लोग मां को याद कर रहे… पिता जी ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर कहा तुम्हारी मां शिवभक्त थी… तपस्वनी थी… मैं उनसे लिपटकर खूब रोया…फिर मैं एकांत में गंगा मैया के घाट पर आकर बैठ गया…दूर से देख रहा था मैं मां की जलती हुई चिता को… मुझे याद आ रही थीं मां की बातें… मेरी आंखों से लगातार आंसू झर रहे थे…फिर मां ने मुझसे बहुत बातें की…मेरे आंसुओं को पोंछा और कहा खुश रहना…सबका ख्याल रखना… अपने पिता का बहुत ज्यादा… मां जा चुकी है… किंतु मुझे लगता है वह मुझसे अभी भी बात करती है… पापा कह रहे थे वह मुझसे बहुत करती थी…हालांकि मां हम सभी भाई बहनों से बहुत प्यार करती थी….मुझे अभी भी मां की बहुत याद आ रही है
सेना में भर्ती से सेवानिवृत्ति तक 26 अक्टूबर 1991 को सुरेश सिंह चौहान भारतीय सेना में भर्ती हुए। 31 अक्टूबर 2021 को सेवानिवृत्त हुए। कुल सेवा: 30 साल 6 दिन।
इस दौरान 8 प्रमोशन मिले। 9 मेडल मिले। बॉर्डर पर देश की रक्षा की।
सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा सेना से आने के बाद कैप्टन चौहान ने नौकरी नहीं की। पूरा समय समाज सेवा को दिया।
1. गांव में काम अपने गांव में नशा मुक्ति अभियान चलाया। युवाओं को नशे से दूर किया। लड़के-लड़कियों को सेना में भर्ती के लिए तैयार किया। मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार कराया। ओला बनवाया। पेड़ लगवाए।
2. कोरोना काल में सेवा 2020 में लॉकडाउन के समय AB रोड पर सेवा की। पैदल जा रहे मजदूरों को खाना खिलाया। सेवा भारती के साथ मिलकर 45 दिन काम किया। उनका कहना है: “जनहित के काम में ईश्वर साथ देता है।”
3. पूर्व सैनिकों की मदद आज कैप्टन चौहान खंडवा, खरगोन, बड़वानी के जिला संयोजक हैं। पूर्व सैनिकों और वीर नारियों की मदद करते हैं। पेंशन, इलाज, बच्चों की पढ़ाई में सहायता करते हैं।
26 जनवरी 2024 को भोपाल में पूर्व सैनिकों की परेड में शामिल हुए।
4. सामाजिक मुद्दे महिलाओं के पुनर्विवाह के लिए काम करते हैं। कहते हैं: “आदमी दूसरी शादी कर सकता है तो महिला क्यों नहीं?”
एक्स सर्विसमैन वेलफेयर सोसाइटी और पूर्व सैनिक सेवा समिति से जुड़े हैं।
आस्था और सेवा नर्मदा मैया की पैदल यात्रा की है। मोटरसाइकिल और साइकिल से नर्मदा परिक्रमा की है। आश्रमों से जुड़कर सेवा करते हैं।
जीवन का सिद्धांत कैप्टन चौहान कहते हैं: “मौत एक सच है। आई होगी तो कोई बचा नहीं सकता। नहीं होगी तो कोई मार नहीं सकता। इसलिए डरना नहीं, सेवा करनी है।”
उनका मानना है: “सेना से सेवानिवृत्ति मिल सकती है, सेवा से नहीं। देश पहले था, देश पहले है, देश पहले रहेगा।”
30 साल का अनुभव सेना ने अनुशासन सिखाया। देशभक्ति सिखाई। सेवा का भाव दिया। आज भी वही भाव लेकर काम कर रहे हैं। गांव, समाज और पूर्व सैनिकों के लिए दिन-रात एक किए हैं।
पिछले 3 साल में उनके प्रयास से 25 से ज्यादा युवा सेना और पुलिस में भर्ती हुए हैं। सैकड़ों परिवारों को मदद मिली है।
सत्य उदय सम्मिट 2026 में संवाद कैप्टन सुरेश सिंह चौहान ‘सत्य उदय सम्मिट 2026’ के मंच से लाइव संवाद करेंगे। और अपने 30 साल के अनुभव से हम सभी को गौरवान्वित करेंगे।