देवास

ज्ञान का प्रकाश सभी अंधेरों को खत्म कर देता है – स्वामी विवेकानंद

INFORM HUMAN. बीसीजी शिक्षा महाविद्यालय देवास की एम एड तृतीय सेमेस्टर में अध्धयन रत
पूनम चौहान अपनी प्राध्यापिका सरोज हांडा के मार्गदर्शन में
स्वामी विवेकानंद जी के विचारों का आधुनिक शिक्षा नीति पर असर विषय पर लघु शोध प्रतिवेदन तैयार कर रही हैं।

स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार ,
शिक्षा एक सतत प्रक्रिया है, इसमें जीवन के सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए। शारीरिक, भौतिक, बौद्धिक, भावनात्मक नैतिक और आध्यात्मिक उनके शैक्षिक विचारों का आज बहुत महत्व है क्योंकि आधुनिक शिक्षा ने मानव जीवन के मूल्यों से अपना बहुत कुछ संबंध खो दिया है ।
उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य मस्तिष्क में कुछ तथ्य हंसना नही बल्कि इसका
उद्देश्य मानव मन को सुधारना होना चाहिए।
स्वामी विवेकानन्द के अनुसार शिक्षण विधि :-
योग विधि का प्रयोग ।
ज्ञान अर्जित करने के लिए विचार
के लिए विचार-विमर्श,व्याख्यान, उपदेश एवं मन एवं तर्क विधि का प्रयोग। को केन्द्रित करने के लिए केन्द्रिकरण विधि। शिक्षा ले गुणों एवं आदेशों के अनुसरण हेतू ‘अनुकरण विधि’ का प्रयोग किया जाना चाहिए

स्वामी विवेकानंद के शैक्षिक विचार समाज को शिक्षित करके एक
सभ्य समाज समाज बनाने का काम करते हैं।
शोधार्थी
श्रीमती पूनम चौहान

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