देवास

किसी भी शहर के विकास में महापौर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है- राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी

अखिल भारतीय महापौर परिषद राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सम्मेलन में हुआ मंथन

देवास। हमारे प्रदेश का तेजी से विकास हुआ है। हमने स्वच्छता में खिताब जीते हैं। आज लगातार 7 वर्षों से इंदौर सबसे स्वच्छ शहर बना है। हमारा प्रदेश स्वच्छता में दूसरे स्थान पर है। इसके लिए हम प्रदेशवासियों व सभी महापौर को बधाई देते हैं। अभी स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा चल रहा है। अगर हम स्वच्छता को सेवाभाव से नहीं देखेंगे तो परिणाम नहीं मिलेंगे। हमारे संस्कार में स्वच्छता होनी चाहिए, स्वभाव में स्वच्छता होनी चाहिए। अगर इसका उदाहरण देखना है तो आप सभी इंदौर में आकर देख सकते हैं। हमारे संस्कार व स्वभाव में स्वच्छता नहीं आएगी, तब तक हमें सफलता नहीं मिलेगी। किसी भी शहर के विकास में महापौर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

यह विचार देवास की होटल रामाश्रय पैराडाइज में आयोजित अखिल भारतीय महापौर परिषद राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सम्मेलन में नगरीय प्रशासन एवं विकास मप्र शासन की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने उद्बोधन में व्यक्त किए। इससे पूर्व मां भारती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया गया। अतिथियों का स्वागत देवास महापौर गीता दुर्गेश अग्रवाल, सभापति रवि जैन, विधायक एवं महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल व आयुक्त रजनीश कसेरा ने किया। सभी पधारे महापौरों का शाल-श्रीफल से एमआईसी सदस्यों ने स्वागत किया।

सम्मेलन में विधायक गायत्री राजे पवार ने संबोधित करते हुए कहा कि महापौर वह शख्सियत है जो पूरे शहर के विकास की बागडौर अपने हाथ में लेकर चलता है। विकास के क्षेत्र में हमने नए आयाम गढ़े हैं। पिछले कुछ सालों में देवास को एक बहुत ही उन्नत एवं विकसित देवास बनाकर पेश किया है। हमारी भाजपा की सरकार के कार्यों का उत्तम तरीके से क्रियान्वयन नगर निगम में हो रहा है। विधायक ने कहा, कि हमारे देवास के पास इंदौर-उज्जैन दो बड़े शहर हैं, जिनसे हमें बड़ा चैलेंज मिलता है। इनके स्टेंडर्ड ऊंचे होते हैं, जो हमारे लिए चुनौतीपूर्ण होते हैं। इन दोनों शहरों के बीच में होने के बाद भी देवास ने अपनी पहचान नहीं खोई है।

पूर्व गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने संबोधित करते हुए कहा, कि महापौर परिषद केवल महापौरों का संगठन नहीं है। यह नगर निगम का संगठन है। 74वें संशोधन के बाद इस नगरीय निकाय को स्थानीय सरकार का दर्जा मिल गया। जिस प्रकार केंद्र व राज्य के बीच संबंध है और मर्यादा है वैसे ही संबंध राज्य एवं स्थानीय सरकारों के बीच में होना चाहिए। आप सभी जनप्रतिनिधि हैं। किसी भी काम के पीछे लगे रहो तो परिणाम निकलता है। सम्मेलन में सांसद व राज्य सभा सदस्य नवीन जैन, राष्ट्रीय महापौर परिषद अध्यक्ष माधुरी अतुल पटेल, जिला अध्यक्ष राजीव खंडेलवाल ने भी संबोधित किया।

कार्यशाला में साझा किए विचार-

दोपहर में सभी महापौरों की कार्यशाला आयोजित हुई। इसमें सभी ने अपने-अपने विचारों को साझा किया। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि मैं अहिल्या की नगरी का प्रथम सेवक हूंं। 74वें संशोधन के अनुरूप सिटी की सरकार कैसे चलेगी, इसके नियम पर ध्यान देना चाहिए। आंध्रप्रदेश के करनुल के महापौर बोयायेल्ला रमाई ने कहा कि मेयर के प्रोटोकाल एमएलए के ऊपर है, लेकिन हमें जो सुविधा मिलनी चाहिए वह कम है। अलग-अलग राज्य में अलग-अलग पॉलिसी है। वन नेशन वन इलेक्शन के समान पूरे देश में मेयर के प्रोटोकाल व सुविधाएं समान होनी चाहिए। छिंदवाड़ा के महापौर विक्रमसिंह अहाके का कहना था कि महापौर के अधिकारों में बढ़ोतरी होनी चाहिए। इस प्रकार की कार्यशाला से काफी कुछ सीखने को मिलता है। यहां से सीखकर हमें अपने शहर के विकास में योजना बनाना चाहिए।

रायपुर के महापौर एेजाज देवर का कहना था कि मैं लगातार बैठकों में जाता हूं। जहां तक बात 74वें संशोधन की है, उसको लेकर ठोस निर्णय नहीं आता। मैं रूस गया था, वहां देखा तो मेयर किसी मुख्यमंत्री से कम नहीं है। मेरा कहना है कि मेयर को उसके पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए। उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने कहा महापौरों के अधिकारों को लेकर विचार-विमर्श होना चाहिए और नीति निर्धारण किया जाना चाहिए।

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