
राजेश व्यास, इन्फार्म ह्यूमन


देवास जिले के खातेगांव क्षेत्र में इंदौर बैतूल हाईवे पर अवैध शराब से भरे ट्रक को रोक रहे थाना प्रभारी दिलीप पुरी को चालक ने उसी ट्रक से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल इस जांबाज अधिकारी का उपचार के दौरान जीवन छिन गया। पीछे रह गया बिलखता परिवार और एक चुभता सवाल—क्या कानून की रक्षा करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी होगी?
आखिर यह कैसा दुस्साहस है कि अपराध रोकने निकले अधिकारी को ही कुचल दिया जाए? अपराधियों में कानून का भय कहां है? कब तक कर्तव्य निभाने वालों के परिवार ऐसी असहनीय कीमत चुकाते रहेंगे?
निष्ठावान अफसर दिलीप पुरी की शहादत पर मन शोक से भरा है, लेकिन भीतर गहरा आक्रोश भी है। खातेगांव की यह हृदयविदारक घटना पूरे सिस्टम से जवाब मांगती है।
श्री पुरी के परिजनों पर दुखों का जो पहाड़ टूटा है, उसकी पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं। पूरा पुलिस परिवार शोक में है। क्षेत्र में दुख है, आक्रोश है। एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का इस तरह हमसे छिन जाना पूरे समाज की क्षति है।
आखिर शराब का यह अवैध कारोबार और कितने घरों के चिराग बुझाएगा?
अवैध शराब का कारोबार लोगों के जीवन, परिवारों और समाज की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। इसे रोकने निकले पुलिस अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़े, तो व्यवस्था को अपनी कार्यप्रणाली की कठोर समीक्षा करनी ही होगी। निगरानी और कार्रवाई में चूक कहां रह जाती है? यह कारोबार बार-बार कैसे पनपता है? जिन पर समाज की सुरक्षा का दायित्व है, उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
इन सवालों को शोक और संवेदना के बीच दबने नहीं दिया जा सकता।
नहीं, अब और नहीं।
इस दुस्साहस का जवाब कठोर कानूनी कार्रवाई और स्पष्ट जवाबदेही से देना होगा। घटना के दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाने के साथ अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई करनी होगी। निर्माण, परिवहन, बिक्री और उससे होने वाली कमाई की हर कड़ी तक जांच पहुंचे। किसी स्तर पर संरक्षण या मिलीभगत मिले, तो जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई हो।
कुछ दिनों की सख्ती पर्याप्त नहीं है। अवैध कारोबार दोबारा पनपने न पाए, इसके लिए निरंतर निगरानी हो और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। कार्रवाई का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
इस लड़ाई में राजनीतिक दलों और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सोचना होगा। अपराधी की पहचान, पहुंच या प्रभाव चाहे जो हो, कानून के सामने उसे जवाब देना ही होगा। कार्रवाई में कोई दबाव, कोई पक्षपात और कोई ढिलाई स्वीकार नहीं होनी चाहिए।
पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर भी उतनी ही गंभीरता जरूरी है। जोखिमपूर्ण कार्रवाई के दौरान पर्याप्त बल, संसाधन और सुरक्षित कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना व्यवस्था का दायित्व है। समाज की रक्षा करने वालों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
श्री पुरी के परिवार के प्रति हमारी जिम्मेदारी श्रद्धांजलि के शब्दों तक सीमित नहीं है। उनके सम्मान, संबल और भविष्य के लिए लंबे समय तक साथ खड़ा रहना होगा।
दिलीप पुरी की शहादत व्यर्थ न जाए—अब यही हमारा सामूहिक संकल्प होना चाहिए।
दोषियों को सजा, अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश और जवाबदेह व्यवस्था—यही इस जांबाज थाना प्रभारी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विनम्र श्रद्धांजलि।





