देवास

सेंट्रल इंडिया एकेडमी, देवास के डायरेक्टर चरणजीत अरोरा ‘बंटी भैया’: नारियल सी शख्सियत

इन्फार्म ह्यूमन, देवास

देवास की शिक्षा जगत में प्रतिष्ठित नाम | अनुशासन के साथ संवेदना का संगम | हजारों छात्रों के भविष्य निर्माता


प्रस्तावना: नारिकेल समाकारा दृश्यन्ते खलु सज्जनाः

देवास के प्रतिष्ठित स्कूलों में शुमार सेंट्रल इंडिया एकेडमी के डायरेक्टर चरणजीत अरोरा, जिन्हें छात्र, अभिभावक और स्टाफ प्यार से ‘बंटी भैया’ कहते हैं, एक ऐसी शख्सियत हैं जिन पर संस्कृत का यह श्लोक अक्षरशः लागू होता है:

नारिकेल समाकारा दृश्यन्ते खलु सज्जनाः।
अन्ये बदरिकाकारा बहिरेव मनोहराः॥

अर्थात् सज्जन व्यक्ति नारियल के समान होते हैं – बाहर से कठोर और भीतर से कोमल, मधुर जल से भरे हुए। बंटी भैया का व्यक्तित्व भी कुछ ऐसा ही है – अनुशासन के मामले में अडिग, पर छात्रों के भविष्य को लेकर हृदय से कोमल।

1. अनुशासन के साथ अपनापन

सी.आई.ए. कैंपस में बंटी भैया की पहचान एक कठोर प्रशासक की है। समय की पाबंदी, यूनिफॉर्म, पढ़ाई में कोई समझौता नहीं। लेकिन यही कठोरता जब किसी जरूरतमंद छात्र की फीस माफ करने, किसी बीमार स्टाफ की मदद करने या किसी छात्र को व्यक्तिगत गाइड करने में बदलती है, तब उनका नारियल सा कोमल हृदय सामने आता है।

2. शिक्षा से संस्कार तक का सफर

चरणजीत अरोरा के नेतृत्व में सेंट्रल इंडिया एकेडमी सिर्फ किताबी ज्ञान का केंद्र नहीं रही। यहाँ शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर दिया जाता है। मॉर्निंग असेंबली में राष्ट्रगान के साथ नैतिक शिक्षा, खेल मैदान में टीम भावना और वार्षिकोत्सव में भारतीय संस्कृति की झलक – यह संतुलन बंटी भैया की सोच का परिणाम है।

3. विजन: हर बच्चा हीरा है, बस तराशने वाला चाहिए

उनका मानना है कि “कोई भी बच्चा कमजोर नहीं होता, हर किसी में कोई न कोई हुनर छिपा है।” इसी सोच के तहत स्कूल में एकेडमिक के साथ स्पोर्ट्स, म्यूजिक, डांस, आर्ट, रोबोटिक्स को बराबर महत्व दिया जाता है। बोर्ड रिजल्ट के साथ-साथ राज्य व अन्य स्तर की प्रतियोगिताओं में भी सी.आई.ए. के छात्र सहभागिता करते हैं।

4. स्टाफ के लिए ‘बड़े भाई’

सेंट्रल इंडिया एकेडमी के शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए बंटी भैया सिर्फ डायरेक्टर नहीं, बड़े भाई हैं। किसी के घर में शादी हो या इलाज की जरूरत, वे हमेशा खड़े मिलते हैं। यही वजह है कि स्कूल में शिक्षकों का स्टेबिलिटी रेट बहुत ऊंचा है और इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलता है।

5. अभिभावकों का भरोसा

देवास शहर में यह आम बात है – “बंटी भैया के स्कूल में बच्चा डाल दो, टेंशन खत्म।” अभिभावकों का यह भरोसा एक दिन में नहीं बना। वर्षों की पारदर्शिता, रिजल्ट और छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने से यह कमाया गया है।

6. सामाजिक सरोकार

शिक्षा के व्यवसायीकरण के दौर में भी चरणजीत अरोरा सामाजिक दायित्व नहीं भूलते। समय-समय पर निःशुल्क हेल्थ कैंप, पौधरोपण, स्वच्छता अभियान में स्कूल की सक्रिय भागीदारी रहती है। उनका मानना है कि “अच्छे नागरिक बनाना, अच्छे मार्क्स से ज्यादा जरूरी है।”


इन्फार्म ह्यूमन बॉक्स: शिक्षा संवाद का मंच

इन्फार्म ह्यूमन शिक्षा, सेवा और सामाजिक नवाचार के क्षेत्र में कार्य करने वाला एक संगठन है। संगठन द्वारा समय-समय पर शिक्षाविदों, स्कूल संचालकों और नीति-निर्माताओं के लिए सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं।

आगामी 19, 20, 21 जून को पचमढ़ी में ‘इन्फार्म ह्यूमन’ द्वारा शिक्षा एवं सेवा सम्मिट का आयोजन किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय सम्मिट में “नई शिक्षा नीति के जमीनी क्रियान्वयन” और “स्कूलों की सामाजिक भूमिका” जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इस सम्मिट में सेंट्रल इंडिया एकेडमी के डायरेक्टर श्री चरणजीत अरोरा भी हिस्सा लेंगे।


निष्कर्ष: नाम ही काफी है

देवास में शिक्षा की बात हो और ‘बंटी भैया’ का नाम न आए, ऐसा हो नहीं सकता। बाहर से अनुशासन की नारियल सी कठोरता और भीतर से छात्र-हित का मीठा पानी – इसी संतुलन ने चरणजीत अरोरा को शिक्षा जगत में अलग पहचान दी है।

सेंट्रल इंडिया एकेडमी की सफलता का सबसे बड़ा कारण यही है कि यहाँ का डायरेक्टर पहले एक शिक्षक है, फिर व्यवसायी।

“स्कूल बिल्डिंग से नहीं, सोच से बनता है” – बंटी भैया की यही सोच सी.आई.ए. को देवास का गौरव बनाती है।

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