इन्फार्म ह्यूमन, देवास
दबंग शख्सियत | बेबाक लेखनी | समय के पाबंद | राजनेता के गुण, अधिवक्ता का तर्क, समाजसेवी का जज्बा
प्रस्तावना: एक शख्सियत, जो खुद में संस्थान है
कुछ लोग सिर्फ नाम नहीं होते, पूरा दौर होते हैं। जिन्हें जानने के लिए 15 साल भी कम पड़ जाते हैं। हर मुलाकात में वे कुछ नया सिखा जाते हैं।
उनकी कार्यशैली देखिए तो लगता है – पत्रकारिता सिर्फ खबर लिखने का नाम नहीं, जिम्मेदारी निभाने का नाम है। वह एक दबंग शख्सियत हैं। उन्हें सिर्फ पत्रकार कहने भर से उनके व्यक्तित्व को समेट पाना मुश्किल है। उनमें राजनेता के गुण हैं, अधिवक्ता का तर्क है और समाजसेवी का जज्बा भी।
जी हां, मैं बात कर रहा हूं वरिष्ठ पत्रकार अनिल राज सिंह सिकरवार की। जिनकी कलम चलती है तो सच बोलती है, और मौजूदगी होती है तो माहौल खुद-ब-खुद गंभीर हो जाता है।
1. व्यक्तित्व में आकर्षण, लेखनी में धार
अनिल राज सिंह सिकरवार के व्यक्तित्व में एक अलग ही आकर्षण है। पहली मुलाकात में ही वे अपनी बातों से प्रभावित कर देते हैं। उनकी लेखनी में धार है। मैंने अक्सर उनकी खबरों पर समीक्षा की है – वे जब लिखते हैं तो खुलकर लिखते हैं। न किसी का दबाव, न कोई लाग-लपेट। सच को सच कहने का साहस उनकी कलम की सबसे बड़ी पहचान है।
2. समय के पाबंद, हर मंच पर मौजूद
उनकी सबसे बड़ी खूबी है समय की पाबंदी। शहर में कोई भी छोटा-बड़ा आयोजन हो, प्रेस वार्ता हो या सामाजिक कार्यक्रम – अनिल जी वहां समय से पहले पहुंचते हैं। यही वजह है कि खबर कभी उनसे छूटती नहीं। हर आयोजन में पहुंचना, सभी से मिलना और हर व्यक्ति को महत्व देना उनका स्वभाव है। इसी संपर्क और संवाद के कारण वे हमेशा अप टू डेट रहते हैं।
3. पत्रकार से बढ़कर: बहुआयामी व्यक्तित्व
सिर्फ पत्रकार कहना उनके साथ न्याय नहीं होगा। वे एक साथ कई भूमिकाएं जीते हैं।
- राजनेता के गुण: जन-समस्याओं की गहरी समझ, लोगों से जुड़ाव और नेतृत्व क्षमता उनमें कूट-कूट कर भरी है। वे यदि राजनीति में होते तो यकीनन आज वे किसी बड़े दायित्व का निर्वहन कर रहे होते।
- अधिवक्ता का तर्क: हर मुद्दे पर तथ्य, तर्क और कानून की बारीकी से पकड़। उनकी खबर सिर्फ सूचना नहीं, विश्लेषण होती है।
- समाजसेवी का जज्बा: खबर लिखकर कर्तव्य खत्म नहीं मानते। पीड़ित की मदद के लिए जमीन पर उतरना उनका स्वभाव है।
4. बेबाकी और अपडेट रहने की आदत
आज के दौर में जब पत्रकारिता पर सवाल उठते हैं, अनिल राज सिंह सिकरवार जैसे लोग उम्मीद जगाते हैं। उनकी बेबाकी ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। सत्ता से सवाल हो या व्यवस्था पर चोट, वे लिखने से कभी पीछे नहीं हटे। साथ ही हमेशा अप टू डेट रहने की उनकी आदत उन्हें दूसरों से अलग करती है। कौन सा अधिकारी कहां गया, किस योजना में क्या बदलाव हुआ – उनकी फाइल हर वक्त तैयार रहती है।
5. जिंदादिल इंसान, मजबूत इरादे
पेशेवर जीवन की सख्ती के बावजूद वे जिंदादिल इंसान हैं। यारों के यार, दिल के साफ। हर किसी से मिलना, हालचाल पूछना उनकी आदत में शुमार है। लेकिन अन्याय के सामने वे चट्टान की तरह अडिग हो जाते हैं। 15 साल में मैंने उन्हें टूटते नहीं, और मजबूत होते देखा है। दबाव उनके इरादों को और धार देता है।
निष्कर्ष: एक मिसाल, जो कायम है
अनिल राज सिंह सिकरवार का नाम पत्रकारिता में एक मिसाल है। वे उन लोगों में से हैं जो कलम को सिर्फ रोजी-रोटी नहीं, जिम्मेदारी मानते हैं। समय के पाबंद, हर आयोजन में मौजूद और हमेशा अप टू डेट रहने वाले इस पत्रकार की खबरें सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा करती हैं।
राजनीति में नहीं होने के बावजूद वे जनता के नेता हैं। काली कोट न पहनकर भी वे वकील हैं। और बिना किसी पद के वे समाजसेवी हैं।
ऐसे जिंदादिल और दबंग शख्सियत वाले पत्रकार कम ही होते हैं। कलम के इस सिपाही को सलाम।
जन्मदिन पर विशेष।




