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कारगिल युद्ध की गाथा, कैसे की थी जंग फतह; पढ़िए ब्रिगेडियर सुधीर सावंत की जुबानी

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ब्रिगेडियर सुधीर सावंत- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV
ब्रिगेडियर सुधीर सावंत

कारगिल का युद्ध, यह वही जंग थी जिसकी शुरुआत पाकिस्तान ने हमारी सरजमीं में घुसककर की थी। जिसके जवाब हमारी भारतीय सेना ने उन्होंने घुटने के बल ला खड़ा कर दिया था। ब्रिगेडियर सुधीर सावंत, कारगिल युद्ध के दौरान ब्रिगेड हेड क्वार्टर(द्रास सेक्टर) में मेजर पोस्ट पर तैनात थे। उन्होंने पहले श्रीनगर से द्रास, कारगिल और अन्य युद्धस्थल पर हथियारों, बम विस्फोटक, और अन्य साधन सामग्री को पहुंचानें की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। वह, मई के अंत में द्रास सेक्टर में वॉरजोन में आखिर तक तैनात रहे।  

‘श्रीनगर से लेह तक मेन लाईन पर कब्जा करने की थी योजना’

ब्रिगेडियर सुधीर सावंत ने बताया कि 3 मई को एक चरवाहा ने आर्मी को सूचना दी। इसके बाद पांच मई को लेफ्टिनेंट कालिया जब पेट्रोलिंग के लिए गए तो उनको टॉर्चर कर मारा दिया गया। उसके बाद पता चला कि इन्होंने पूरा द्रास से कारगिल और आगे तक कब्जा किया है। उन्होंने बताया कि मुशर्रफ की कोशिश थी कि श्रीनगर से लेह तक मेन लाईन पर भी कब्जा किया जाए।

‘एक-एक प्लाटून आगे बढ़ती थी’

उन्होंने बताया कि लड़ाई पहाड़ों पर थी, इसलिए एक-एक प्लाटून आगे बढ़ती थी। वहीं, हथियारों की सप्लाई के वक्त हम दुश्मनों के टारगेट पर रहते थे। उन्होंने बताया कि मैं तो कोल्हापुर 0 फीट से  9 हजार से 14 हजार फीट ऊंचाई पर गया था। उन्होंने कहा कि सबसे पहली लड़ाई मौसम से थी, दुश्मन पहाड़ों के ऊपर थे हम नीचे।

‘पहला पॉइंट तोलोलिंग पर कब्जा’

उन्होंने बताया कि पहला पॉइंट तोलोलिंग पर हमने कब्जा किया। लेफ्टिनेंट थापर इस मौके पर शहीद हुए उनके माथे पर रात में गोली लगी। तब पता चला कि इनके पास नाईट विजन कैमेरा है और आधुनिक हत्यारों से लैस हैं। ये उग्रवादी नहीं बल्कि इसमें पाकिस्तानी आर्मी शामिल है। उसके बाद कैप्टन बत्रा ने टाइगर हिल जीती और 4 बंकर उड़ाए। उन्होंने अपने माता से बात की कहा अच्छा हूं पर ये दिल मांगे मोर फिर आगे पॉइंट 4875 कब्जा करते वक्त वे शाहिद हो गए।

‘कारगिल युद्ध में बोफोर्स गन और तोपों की अहम भूमिका’

उन्होंने बताया कि यादव नाम के एक और सोल्जर थे, उन्होंने(यादव) तो सीधे पहाड़ी पर चढ़ाई की और कई दुश्मनों के बंकर उड़ाए। युद्ध के दौरान बोफोर्स गन और तोपों की अहम भूमिका रही, जिसके लिए गोला बारूद पहुंचानें का जिम्मा हमारा था। उन्होंने कहा कि माइनस 20 डिग्री में हमारे जवानों ने पूरी लड़ाई लड़ी। वहां सब कुछ बेहद मुश्किल था। भारतीय आर्मी कभी हार नही मानती, हम पूरी ताकत के साथ लड़े और जीते।

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