देवास

संपादकीय – सुनो ‘नगर सरकार’

देवास। नगर निगम की हालत ठीक नहीं है…. स्थिति बिगड़ती जा रही है। यह हम नहीं कह रहे हैं। आम बातचीत में यह बात अब निकलकर सामने आने लगी है। पिछले कुछ माह से इस तरह के वाक्य ज्यादा सुनने में आ रहे हैं। बार बार यह बात जब सुनने में आई तो मुझे इस विषय पर चिंतन करते हुए विचाराधीन अवस्था में पहुंचने पर मजबूर होना पड़ा। मैं जब भी समय मिलता इसी विषय पर सोचने लगता कि ऐसा क्यों हो रहा है। क्यों ऐसी बातें उठ रही हैं, क्यों लोग कह रहे हैं कि नगर निगम की हालत ठीक नहीं है। मैंने बहुत विचार किया। भूतपूर्व नगर सरकार के प्रतिनिधियों की कार्यशैली का अवलोकन किया, उनके काम करने के तरीकों पर विचार किया। उनके समय की स्थिति पर गौर किया। पूर्व आयुक्तों की कार्यशैली भी याद आई, तब में और अब में क्या अंतर है, इस पर भी विचार किया, लगा कि शायद फिलहाल या यूं कहें कि कुछ तो गडबड है कहीं न कहीं, अन्यथा ऐसे ही यह बात नहीं उठती। अब गड़बड़ कहां है, क्यों बन रही है ऐसी स्थिति, इस पर चिंतन मनन की जिम्मेदारी वर्तमान नगर सरकार की है। वैसे मेरे अब तक के विश्लेषण में मुझे दो बातें लगती हैं, दो कारण लगते हैं एक तो निजी स्वार्थ की अधिकता और दूसरा प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव। सुनो नगर सरकार अब आत्मविश्लेषण का समय आ गया है।

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