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Karti Chidambaram

Image Source : PTI
कार्ति चिदंबरम

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कार्ति चिदंबरम के खिलाफ चाइनीज वर्कर को अवैध तरीके से इंडियन वीजा दिलवाने और एडवांटेज स्ट्रेटेजिक प्राइवेट लिमिटेड को 15,000 अमेरिकी डॉलर (12.88 लाख रुपये) की रिश्वत देने के मामले में जांच चल रही है। 2018 में सीबीआई ने कार्ति, एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, एस भास्करारामन और अज्ञात लोगों के खिलाफ FIPB यानी विदेशी संस्थागत संवर्धन बोर्ड मामले में प्रारंभिक जांच शुरू की थी। जांच में पाया गया डियाजियो स्कॉटलैंड और सिकोइया कैपिटल्स ने चुपचाप एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के एकाउंट में फंड्स ट्रांसफर किए थे। इसके बाद नया मामला दर्ज किया गया है।

एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड वही कंपनी है, जो आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई और ईडी की रडार पर थी और साथ ही इस कंपनी का नाम चाइनीज वर्कर को अवैध तरीके से इंडियन वीजा दिलवाने में भी सामने आया था।

2018 में गिरफ्तार हुए थे कार्ति चिदंबरम

2018 में कार्ति चिदंबरम को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और बाद में कार्ति के पिता पी चिदंबरम को सीबीआई और ईडी दोनों ने गिरफ्तार किया था। कार्ति चिदंबरम पर सीबीआई का आरोप है कि डायगियो स्कॉटलैंड ने उनसे संपर्क किया और प्रतिबंध हटाने के लिए एडवांटेज स्ट्रेटेजिक प्राइवेट लिमिटेड को 15,000 अमेरिकी डॉलर (12.88 लाख रुपये) का भुगतान किया, जिसे कार्ति चिदंबरम और एस भास्कररमन कंट्रोल करते है। डिएगो स्कॉटलैंड कंपनी भारत में जॉनी वॉकर को इंपोर्ट करने का काम करती है। भारत में इम्पोर्टेड ड्यूटी फ्री शराब बेचने वाली आईटीडीसी ने 2005 में डिएगो को ड्यूटी फ्री प्रोडक्स्ट्स बेचने के लिए चुना, जिस वजह से जॉनी वॉकर व्हिस्की की सेल में 70 प्रतिशत की कमी आई थी। 

सेक्वोइया कैपिटल पर संदिग्ध शेयर लेनदेन का आरोप

एक अन्य मामले में सेक्वोइया कैपिटल मॉरीशस और एएसपीसीएल के बीच वासंत हेल्थकेयर के माध्यम से संदिग्ध शेयर लेनदेन हुए। कार्ति चिदंबरम को लाभ पहुंचाने के लिए वासंत ग्रुप के शेयरों को सीधे अधिग्रहित करने के बजाय, इन्हें एएसपीसीएल के माध्यम से रूट किया गया। इस लेनदेन में, एएसपीसीएल को 22.50 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जो प्रति शेयर 7500 रुपये के हिसाब से था। जबकि इन शेयरों की खरीद मूल्य केवल 30 लाख रुपये थी। यह लेनदेन संदिग्ध है और इसकी जांच की आवश्यकता है।

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