राजेश व्यास।
साहब के… बहुत सारे किस्से हैं, जो मुझे अकसर याद आते हैं। तब मैं दैनिक भास्कर में था, सुबह से ही बूंदाबांदी हो रही थी, शहर के हर रास्ते पर लोगों का हुजूम था, बाहर से लोग आते जा रहे थे, दोपहर बाद तो जनसैलाब उमड़ पड़ा था, हर कोई अपने महाराज के अंतिम दर्शन करना चाहता था, शाम तक मुख्यमंत्री भी पहुंच गये थे, महाराज पंचतत्व में विलीन हो चुके थे, किंतु उनकी स्मृतियां उनके व्यक्तित्व और उनके किस्से और अधिक जीवंत हो चुके थे, तब से बहुत बार शहर के नुक्कड़ से लेकर बड़ी बड़ी सभाओं और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में साहब का जिक्र हुआ उन्हें याद किया और हमेशा किया जाता रहेगा यही उनके व्यक्तित्व की खूबी थी, लोग छोटे बड़े सभी उनसे हृदय से जुड़े हुए थे, वे एक ओर जहां कुशल शासक थे वहीं वे अपनों के बीच सरल सहज दिखाई देते थे। मैंने बहुत बार अपने पत्रकार साथियों के साथ उन्हें बहुत सरलता से बात करते हुए देखा, तब मोबाइल का चलन इतना नहीं था। ऐसे में कभी कभार मुझे खबर के लिए वर्जन लेने के लिए मुझे पैलेस पर लैंडलाइन पर फोन लगाकर साहब से बात करना होती थी, बहुत सरलता से बात करते थे। वे राजनीति के विशेषज्ञ थे, बहुत बार ऐसा हुआ कि उन्होंने पैलेस पर बैठे बैठे ही शहर के राजनीतिक समीकरण सकारात्मक किये, शहर में शांति सद्भावना का माहौल बना रहे यह भाव उनके केंद्र में हमेशा रहता था, ट्रेन से पानी लाकर शहर के लोगों की प्यास बुझाने से लेकर विकास के कई ऐसे काम करवाए जिनके कारण देवास मजबूत हुआ। उन्होंने विकास के कई प्लान कई प्रोजेक्ट तैयार किये थे, उनके जाने के बाद इन प्लान योजनाओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लेकर राजमाता काम कर रही हैं।
यकीनन महाराज साहब के बहुत किस्से हैं, आज उनकी जन्म जयंती पर उन्हें सादर नमन।




