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निरीक्षण

वन स्‍टॉप सेंटर द्वारा संचालित गतिविधियों की ली जानकारी


Dewas| कलेक्‍टर ऋषव गुप्‍ता ने जिला अस्‍पताल परिसर में
संचालित वन स्‍टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वन स्‍टॉप सेंटर की प्रशासक
गीता ठाकुर ने वन स्‍टॉप सेंटर में चल रही गतिविधियों की विस्‍तार से जानकारी दी।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्‍याय, सीईओ जिला पंचायत प्रकाश सिंह चौहान,
महिला बाल विकास अधिकारी रेलम बघेल, सिविल सर्जन डॉ एमपी शर्मा सहित अन्‍य
अधिकारी उपस्थित थे।
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि वन सेंटर के माध्यम से पीड़ित महिलाओं एवं
बालिकाओं से चर्चा कर उन्हें समझाइश दी जाती है। पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं की
काउंसलिंग के लिए समय-समय पर कार्यशाला भी आयोजित की जाती है। शासन द्वारा चलाए

जा रहे वन स्टॉप सेंटर की पीड़ित महिलाएं एवं बालिकाएं लाभ अर्जित कर रही है तथा प्रदेश
सरकार को धन्यवाद भी दे रही है।
वन स्टॉप सेंटर अंतर्गत किसी भी प्रकार की हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को
एक ही स्थान पर अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता, विधिक सहायता, चिकित्सा एवं काउंसलिंग
की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। विभाग द्वारा लगातार पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं के
लिए कार्य किया जाता है तथा उन्हें हर प्रकार का प्रशिक्षण एवं कार्यशाला आयोजित कर उन्हें
आत्मनिर्भर बनाया जाता है। 
वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य एक ही छत के नीचे हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं
बालिकाओं को एकीकृत रूप से सहायता/सहयोग, तत्काल आपातकालीन एवं गैर आपत्कालीन
सुविधा उपलब्ध कराना है। जैसे चिकित्सा, विधिक सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श आदि शामिल
है। लक्षित समूह के तौर पर हिंसा से पीड़ित महिलाएं जिसमें 18 वर्ष से कम आयु की
बालिकाओं भी सम्मिलित हैं, उन्हें भी सहायता प्रदान करना है। 
वन स्टॉप सेंटर में हिंसा से पीड़ित महिलाओं को बच्चा एवं रेफरल सुविधा प्रदान की
जाती है। वन स्टॉप सेंटर के लिए देवास का दूरभाष क्रमांक 07272-250126 है। इस नंबर से
संपर्क कर इस संबंध में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस कार्य के लिए राष्ट्रीय
स्वास्थ्य मिशन, मुख्यमंत्री बाल हेल्पलाइन- 181, 1090, 108 की सेवाएं पीसीआर वैन को केंद्र
से संबंध कर हिंसा से पीड़ित महिलाओं को घटना की जगह से बचाव कर, समीपस्थ स्वस्थ
सुविधाएं (शासकीय एवं प्राइवेट) या आश्रय गृह की सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की गाइड लाइन एवं प्रोटोकॉल अनुसार हिंसा से
पीड़ित महिलाओं को तत्काल समीपस्थ अस्पताल में चिकित्सा सहायता/जांच के लिए रेफर किया
जाता है।

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